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Judge-thief jokes

जज (एक परिचित चोर को देखकर ): "तुम ? जब मैं वकील था तुमने साईकिल चुराई | जब सरकारी वकील बना तो मोटरसाइकिल चुराई | और जब मैं यहाँ जज बनकर आया हूँ, तो तुमने कार चुराई | "
अपराधी ने बड़ी ही विनम्रता से कहा, "माई बाप ! आपकी ही तरह मेरी भी प्रमोशन होती रही हैं | "


जज :"तुमने उसकी जेब में हाथ क्यों डाला ? "
अपराधी : "जी, ठंड लग रही थी | "

कचहरी से बहार निकल कर वकील अपने मुवक्किल से बोला,"मुबारक हो, तुम केस जीत गए | अब मेरी फीस के 150 रूपए मुझे दे दो | "
मुवक्किल ने पूछा,"वकील साहब आपने मेरा केस क्या लड़ा हैं ? "
"यही कि ---- तुमने पचीस रूपए के लिए एक आदमी का खून कर दिया | "
"अब आप खुद ही सोचिए कि जब मैं पचीस रूपए के लिए खून कर सकता हूँ तो डेढ़ सौ रूपए के लिए क्या नहीं कर सकता ?"